चंद्र महादशा क्या लाती है
चंद्रमा मन, भावनाओं, स्मृति, पोषण और माता का कारक है। इसकी महादशा 10 वर्ष की होती है और आम तौर पर ध्यान को घर, परिवार, भावनात्मक सुरक्षा और लोगों की ओर ले जाती है। जीवन अक्सर मन की स्थिति के प्रति ज़्यादा संवेदनशील लगता है, और महिलाओं व समाज से संबंधों का महत्व बढ़ जाता है।
पराशर के अनुसार बली चंद्रमा की दशा सुख-सुविधा, अच्छा भोजन और वस्त्र, सत्ता में बैठे लोगों की कृपा, धन, विवाह या संतान का जन्म, और भक्ति देती है। फलदीपिका सुखद यात्राओं, जल, खेती और व्यापार से लाभ, और शांत, संतुष्ट मन की बात करती है।
जब चंद्रमा बली हो या निर्बल
शुक्ल पक्ष का बढ़ता चंद्रमा, जो वृषभ में उच्च का हो, अपनी राशि कर्क में हो, केंद्र या त्रिकोण में हो, या जिस पर बृहस्पति की दृष्टि हो, आम तौर पर लोकप्रियता, भावनात्मक स्थिरता, संपत्ति और सुखी पारिवारिक जीवन देता है। लोग अक्सर ज़्यादा स्नेही बनते हैं और दूसरों को बेहतर समझने लगते हैं।
कृष्ण पक्ष का घटता चंद्रमा, वृश्चिक में नीच का चंद्रमा, 6, 8 या 12वें भाव में बैठा चंद्रमा, या राहु, केतु अथवा शनि के साथ युति वाला चंद्रमा बेचैनी, बदलते मूड, माता की सेहत की चिंता और आर्थिक उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है। नियमित नींद, दिनचर्या और साथ देने वाले लोग सचमुच बड़ा फ़र्क़ लाते हैं।
चंद्र की अंतर्दशा (10 महीने)
पहली अंतर्दशा घर, माता और भीतर के जीवन पर ज़ोर देती है। बली चंद्रमा के साथ यह नया निवास, पारिवारिक सुख और अच्छी प्रतिष्ठा ला सकती है; निर्बल चंद्रमा के साथ मूड में उतार-चढ़ाव और अनिर्णय। कोमल दिनचर्या और जल के पास समय बिताना परंपरा में मन को शांत करने वाला माना गया है।
मंगल की अंतर्दशा (7 महीने)
मंगल चंद्रमा का मित्र है, और परंपरा में दोनों का मेल कमाई से जोड़ा जाता है। ग्रंथ भूमि, संपत्ति और उद्यम से लाभ, और बढ़े हुए साहस का वर्णन करते हैं। पीड़ित मंगल चिड़चिड़ापन और घर में या भाई-बहनों से विवाद ला सकता है, इसलिए ठंडे दिमाग से जवाब देना मदद करता है।
राहु की अंतर्दशा (18 महीने)
चंद्रमा के साथ राहु मन पर धुंध-सी छा सकता है। पराशर चिंता, भ्रम, हानि के डर और छिपे विरोधियों से परेशानी का उल्लेख करते हैं। राहु अच्छी स्थिति में हो, खासकर 3, 6, 10 या 11वें भाव में, तो यह विदेश यात्रा, नए काम और असामान्य लाभ भी दे सकता है। मन को स्थिर रखने वाले अभ्यास और सोच-समझकर लिए निर्णय मदद करते हैं।
गुरु की अंतर्दशा (16 महीने)
यह इस दशा के सबसे अनुकूल हिस्सों में से एक है। बृहस्पति और चंद्रमा का मेल परंपरा में बहुत शुभ माना जाता है: ग्रंथ धन, सम्मान, संतान से सुख, विद्या में प्रगति और अच्छे गुरुओं के मार्गदर्शन का वर्णन करते हैं। पढ़ाई, शुभ संस्कारों और उदारता के लिए यह बढ़िया समय है।
शनि की अंतर्दशा (19 महीने)
शनि चंद्रमा की दशा को कुछ भारी बना सकता है। ग्रंथ बड़ों की ज़िम्मेदारी, धीमी प्रगति, थकान और भावनाओं में रूखेपन का उल्लेख करते हैं। अच्छी स्थिति का शनि धैर्य से किए काम का फल स्थिर लाभ, संपत्ति या टिकाऊ पद के रूप में देता है। अपनी गति स्थिर रखें और बोझ अकेले न उठाएँ।
बुध की अंतर्दशा (17 महीने)
बुध पढ़ाई, लेखन, व्यापार और मित्रता लाता है। बहुत-से लोगों के लिए यह व्यवसाय, संवाद और नए कौशल सीखने का उपजाऊ दौर होता है। बुध चंद्रमा को मित्र नहीं मानता, इसलिए निर्बल बुध घबराहट या गलतफ़हमियाँ ला सकता है; ज़रूरी बातें लिखित में रखें।
केतु की अंतर्दशा (7 महीने)
चंद्रमा के साथ केतु बेचैनी, वैराग्य और योजनाओं में अचानक बदलाव ला सकता है। ग्रंथ परिवार की चिंताओं और सेहत का ध्यान रखने की ज़रूरत बताते हैं। अच्छी बात यह है कि अंतर्ज्ञान तेज़ होता है और साधना ज़्यादा सहज लगती है। इस दौर में सादगी अच्छी रहती है।
शुक्र की अंतर्दशा (20 महीने)
शुक्र सुख-सुविधा, सौंदर्य, कला, वाहन और संबंध लाता है। ग्रंथ विवाह या जीवनसाथी के साथ सुखद समय, नए वस्त्र और आभूषण, और महिलाओं से सहयोग का वर्णन करते हैं। शुक्र निर्बल या पीड़ित हो तो भोग-विलास की अति या संबंधों में तनाव पर ध्यान देना पड़ सकता है।
सूर्य की अंतर्दशा (6 महीने)
चंद्रमा की दशा सूर्य के साथ पूरी होती है। वरिष्ठों या सरकार से पहचान, पिता की ओर ध्यान और दिशा की स्पष्ट समझ इस समय आम हैं। निर्बल सूर्य अधिकारियों से टकराव या ऊर्जा में कमी ला सकता है, इसलिए दिनचर्या संतुलित रखें और विनम्रता से काम लें।
पारंपरिक उपाय
ये भक्ति के ऐसे साधन हैं जो मन को शांत करने में मदद करते हैं। जो आपको उचित लगे, वह चुनें:
- मंत्र: ॐ चंद्राय नमः या ॐ नमः शिवाय का जप करें, खासकर सोमवार को।
- प्रार्थना: शिव या देवी माँ की उपासना करें, और यदि आपकी सेहत अनुमति दे तो सोमवार का व्रत रखें।
- दान: सोमवार को चावल, दूध या सफ़ेद वस्त्र दान करें, और अपनी माता व बुज़ुर्ग महिलाओं की देखभाल करें।
- आचरण: अपनी नींद का ध्यान रखें, शांत लोगों का साथ रखें और उदास मन से बड़े निर्णय न लें।
अपनी कुंडली में इसे कैसे देखें
अपनी कुंडली में चंद्रमा की राशि, भाव, पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) और उसके साथ बैठे ग्रह देखें, और यह भी कि वह किस भाव का स्वामी है (जिस भाव में कर्क राशि है)। फिर दशा पेज पर देखें कि चंद्र महादशा या चंद्र की अंतर्दशा कब चलती है। यहाँ दिए वर्णन सामान्य हैं; फल आपकी अपनी कुंडली तय करती है।